जो खाते हैं वह सीधे आपके रक्त शर्करा को प्रभावित करता है। कुछ आम खाद्य पदार्थ जो रोज़ की थाली में होते हैं, वे चुपचाप शुगर का स्तर बढ़ाते रहते हैं। इनकी पहचान करना ज़रूरी है।
विस्तार से जानें
हर बार जब हम कुछ खाते हैं, तो हमारा शरीर उसे ऊर्जा में बदलता है। इस प्रक्रिया में रक्त में शर्करा का स्तर ऊपर-नीचे होता है। डायबिटीज़ में यह उतार-चढ़ाव ज़्यादा तेज़ और खतरनाक हो सकता है।
कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो बहुत तेज़ी से ग्लूकोज़ में बदलते हैं। इनकी पहचान और इनसे दूरी — यह दोनों मिलकर आपकी दिनचर्या को बेहतर बना सकते हैं। किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लें।
यह पैमाना बताता है कि कोई खाना कितनी जल्दी रक्त में शर्करा बढ़ाता है
सफेद ब्रेड, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, सफेद चावल, आलू के चिप्स
भूरा चावल, केला, किशमिश, पैकेट सूप
दाल, पालक, सेब, अमरूद, ओट्स, बाजरा
इनका असर रक्त शर्करा पर सबसे तेज़ और सबसे ज़्यादा होता है
रस-गुल्ला, जलेबी, बर्फी, हलवा — इनमें मौजूद सरल शर्करा खाते ही रक्त में मिल जाती है। यह डायबिटीज़ में सबसे ज़्यादा नुकसान करने वाले खाद्य पदार्थों में से हैं।
250 ml कोल्ड ड्रिंक में 7 चम्मच तक चीनी हो सकती है। डिब्बाबंद जूस में भी फ्रुक्टोज़ की मात्रा बहुत अधिक होती है जो लिवर पर दबाव डालती है।
सफेद ब्रेड, पाव भाजी की डबलरोटी, बिस्किट — इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत ऊँचा होता है। फाइबर की कमी के कारण ये जल्दी पचकर शुगर बढ़ाते हैं।
सॉसेज, बेकन, नगेट्स और लाल मांस — इनमें संतृप्त वसा की मात्रा अधिक होती है। यह शरीर में इंसुलिन के काम को धीमा कर देती है।
बाहर का खाना — पिज़्ज़ा, बर्गर, मोमो, समोसे — इनमें नमक, रिफाइंड आटा और तेल का खतरनाक मिश्रण होता है जो एक साथ तीन समस्याएं पैदा करता है।
केला, चीकू, आम, अंगूर और सूखे मेवे जैसे खजूर-किशमिश — इनमें प्राकृतिक शर्करा ज़्यादा होती है। डायबिटीज़ में मात्रा का खास ख़याल रखना पड़ता है।
बाज़ार में मिलने वाले मार्जरीन, प्रोसेस्ड बटर और मेयोनेज़ में ट्रांस फैट होता है। यह वसा रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर जमने लगती है और धमनियों को संकरा बना देती है।
इसके अलावा सूजी और सफेद चावल की अधिकता, ज़्यादा नमकीन अचार और पैकेट वाले स्नैक्स — ये सब भी शरीर पर असर डालते हैं। शराब भी रक्त शर्करा को अस्थिर कर सकती है।
सालों पुरानी खाने की आदतें रातोरात नहीं बदलतीं। लेकिन एक-एक कदम उठाकर आप अपनी थाली को धीरे-धीरे बेहतर बना सकते हैं। पहले सिर्फ मीठे पेय बंद करें, फिर मैदे को कम करें — इस तरह बदलाव टिकाऊ बनता है।
डायबिटीज़ में खाने की मात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी उसकी किस्म। एक साथ ज़्यादा खाने की बजाय दिन में थोड़ा-थोड़ा खाना बेहतर माना जाता है। इससे शुगर का स्तर एक समान रहता है।
यहाँ दी गई जानकारी सामान्य शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। अपने चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही अपना आहार योजना बनाएं — हर व्यक्ति की ज़रूरत अलग होती है।
"कोल्ड ड्रिंक और पैकेट जूस बंद करना पहला कदम था। तीन हफ्ते में ही फर्क दिखने लगा। अब पानी और नींबू पानी पीता हूँ।"
— प्रदीप गुप्ता, इंदौर
"सफेद ब्रेड की जगह जौ की रोटी खाने लगी। पहले अजीब लगा, अब आदत हो गई। शुगर की रिपोर्ट पिछली बार अच्छी आई।"
— अनिता मेहता, नागपुर
"बाहर का खाना एकदम बंद कर दिया। घर का सादा खाना — दाल, सब्ज़ी, रोटी। सेहत ठीक है और डॉक्टर भी खुश हैं।"
— संजय पिल्लई, कोच्चि
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बिना चीनी की चाय या कॉफ़ी आमतौर पर ठीक मानी जाती है। दूध वाली चाय में मात्रा का ध्यान रखें। पैकेट वाली इंस्टेंट चाय या कॉफ़ी में छुपी चीनी हो सकती है — उनसे बचें।
आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है, लेकिन उसे पकाने का तरीका भी मायने रखता है। उबला और ठंडा आलू तले हुए से बेहतर होता है। मात्रा सीमित रखें और डॉक्टर से पूछें।
दिन में तीन बड़े भोजन की बजाय पाँच-छह छोटे भोजन बेहतर माना जाता है। इससे एक बार में शुगर का बड़ा उछाल नहीं आता। हर भोजन में प्रोटीन और फाइबर शामिल करने की कोशिश करें।
शुगर-फ्री उत्पादों में चीनी की जगह दूसरे मीठे पदार्थ होते हैं जो कुछ लोगों को अलग तरह से प्रभावित कर सकते हैं। इनका उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें — ये हमेशा बेहतर विकल्प नहीं होते।